विषय: किसानों के लिए ₹5,000/- प्रति माह सार्वभौमिक पेंशन योजना लागू करने हेतु विधिक मांग – आयु सीमा रहित (Without Age Restriction)
हम, Kishan Majdur Ekta, भारत के किसानों के सामाजिक, आर्थिक एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु यह कानूनी मांग-पत्र (Legal Representation) प्रस्तुत कर रहे हैं।
भारत का किसान राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा का आधार है, किंतु विडंबना यह है कि वही किसान वृद्धावस्था, बीमारी अथवा कार्य-असमर्थता की स्थिति में किसी भी सुनिश्चित सामाजिक सुरक्षा (Social Security) से वंचित है।
कानूनी एवं संवैधानिक आधार (LEGAL & CONSTITUTIONAL GROUNDS)
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 (Right to Life with Dignity)
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनेक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि “जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन (Dignified Life) का अधिकार भी शामिल करता है।” वृद्ध अथवा असहाय किसान को बिना आय के छोड़ देना, अनुच्छेद 21 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
2. अनुच्छेद 41 (Directive Principles of State Policy)
राज्य का कर्तव्य है कि वह “वृद्धावस्था, बेरोज़गारी एवं असमर्थता की स्थिति में नागरिकों को सार्वजनिक सहायता प्रदान करे।” किसान इस अनुच्छेद के अंतर्गत सीधे संरक्षित वर्ग में आते हैं।
3. अनुच्छेद 38 एवं 39 – सामाजिक एवं आर्थिक न्याय
राज्य को यह सुनिश्चित करना है कि
आर्थिक असमानता कम हो
जीवन यापन के पर्याप्त साधन उपलब्ध हों
किसान पेंशन योजना का अभाव सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।
4. भेदभाव का प्रश्न (Article 14 – Equality Before Law)
जब अन्य वर्गों को
वृद्धावस्था पेंशन
सामाजिक सुरक्षा योजनाएं प्रदान की जा सकती हैं, तो किसानों को इससे वंचित रखना अनुच्छेद 14 के तहत. असंवैधानिक भेदभाव है।
वर्तमान स्थिति की कानूनी समस्या
PM-Kisan जैसी योजनाएँ आंशिक राहत हैं, पेंशन नहीं
मौजूदा पेंशन योजनाओं में
आयु सीमा
अंशदान (Contribution)
जटिल शर्तें लागू हैं, जो छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अव्यवहारिक हैं।
कानूनी मांग (LEGAL DEMANDS)
अतः हम, Kishan Majdur Ekta, भारत सरकार से यह विधिक मांग करते हैं कि:
सभी किसानों के लिए ₹5,000/- प्रति माह न्यूनतम पेंशन एक केंद्रीय कानून / योजना के माध्यम से लागू की जाए।
2. उक्त पेंशन पर कोई आयु सीमा (No Age Bar) न रखी जाए, क्योंकि किसान का कार्य जीवन अनिश्चित एवं जोखिमपूर्ण होता है।
3. पेंशन पूरी तरह सरकारी वित्त पोषण (Non-Contributory) पर आधारित हो।
4. पेंशन को कानूनी अधिकार (Statutory Right) घोषित किया जाए, न कि विवेकाधीन सहायता।
5. पेंशन राशि को महंगाई सूचकांक (CPI) से जोड़ा जाए।
चेतावनी (LEGAL NOTICE CLAUSE)
यदि उपरोक्त वैधानिक मांगों पर उचित समयावधि में विचार एवं कार्यवाही नहीं की जाती है, तो Kishan Majdur Ekta को यह अधिकार सुरक्षित रहेगा कि वह:
माननीय उच्च न्यायालय / सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करे,
मानवाधिकार आयोग एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं से विधिक हस्तक्षेप की मांग करे।
इसकी समस्त ज़िम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।
निष्कर्ष
किसान को पेंशन देना कोई अनुदान नहीं, बल्कि संवैधानिक कर्तव्य एवं कानूनी दायित्व है। सम्मान के बिना अन्नदाता का जीवन – संविधान की आत्मा के विरुद्ध है।