

1. अनुच्छेद 14 – समानता का अधिकार राज्य का दायित्व है कि वह समान परिस्थितियों में रहने वाले नागरिकों को समान अवसर प्रदान करे। किसान परिवारों को विवाह जैसे सामाजिक दायित्वों में विशेष सहायता न देना असमान व्यवहार है।
2. अनुच्छेद 15(3) – महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान संविधान स्वयं महिलाओं एवं बालिकाओं के हित में विशेष योजनाओं की अनुमति देता है। किसान की बेटी के विवाह हेतु सहायता इसी अनुच्छेद के अंतर्गत पूर्णतः वैध है।
3. अनुच्छेद 21 – जीवन एवं गरिमा का अधिकार विवाह भारतीय समाज में केवल निजी विषय नहीं, बल्कि सामाजिक गरिमा से जुड़ा विषय है। कर्ज़, अपमान और असुरक्षा के कारण किसान परिवारों की गरिमा का हनन अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
आर्थिक असमानता कम करे
कमजोर वर्गों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे
फसली ऋण
a. बीज, खाद, दवा
b. बिजली, पानी
c. प्राकृतिक आपदाओं के बोझ तले दबा हुआ है।
साहूकारों से ऊँचे ब्याज पर ऋण
a. अपमानजनक शर्तें
b. भूमि गिरवी जैसी परिस्थितियों में फँस जाता है।
आर्थिक शोषण
a. मानसिक उत्पीड़न
b. सामाजिक असमानता को जन्म देती है।
1. प्रत्येक पात्र किसान परिवार को ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) तक का ब्याज-मुक्त ऋण उनकी पुत्री के विवाह हेतु प्रदान किया जाए।
2. ऋण की चुकौती अवधि न्यूनतम 7 वर्ष रखी जाए।
3. इस ऋण पर
कोई ब्याज
कोई पेनल्टी
कोई गारंटी/भूमि गिरवी अनिवार्य न की जाए।
4. योजना केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित हो तथा सभी राज्यों में समान रूप से लागू की जाए।
5. यह सहायता किसान का अधिकार (Right-based Scheme) मानी जाए, न कि अनुदान/कृपा।
a.लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से
b. संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) एवं 19(1)(b) के अंतर्गत
c. जन-आंदोलन, ज्ञापन, तथा विधिक विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य होगी।
किसान की बेटी बोझ नहीं है। वह भी इस देश की नागरिक है। उसका सम्मान, सुरक्षा और विवाह में सहायता राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।