विषय:किसानों के लिए सरकारी खाद, बीज एवं कृषि दवाइयों की दुकानें स्थापित करने तथा ब्याजमुक्त एवं सुलभ आपूर्ति सुनिश्चित करने के संबंध में कानूनी मांग।
विषय:किसानों के लिए सरकारी खाद, बीज एवं कृषि दवाइयों की दुकानें स्थापित करने तथा ब्याजमुक्त एवं सुलभ आपूर्ति सुनिश्चित करने के संबंध में कानूनी मांग।
हम, Kishan Majdur Ekta, भारत के किसानों के संवैधानिक, कानूनी एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा हेतु यह औपचारिक कानूनी मांग-पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं।
यह निर्विवाद तथ्य है कि वर्तमान में किसान खाद, बीज एवं कृषि दवाइयों के लिए निजी विक्रेताओं, बिचौलियों एवं साहूकारों पर निर्भर है, जिसके कारण:
मनमाने दाम वसूले जाते हैं
नकली एवं घटिया सामग्री बेची जाती है
किसानों को ऊँचे ब्याज पर उधार लेने को मजबूर किया जाता है
कृषि लागत असहनीय रूप से बढ़ जाती है
यह स्थिति संविधान प्रदत्त अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
कानूनी एवं संवैधानिक आधार (LEGAL GROUNDS)
1. अनुच्छेद 21 – जीवन का अधिकार
भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रदान करता है। महँगी व शोषणकारी कृषि सामग्री किसानों के जीवन और आजीविका पर सीधा आघात है।
2. अनुच्छेद 38 एवं 39 – सामाजिक एवं आर्थिक न्याय
राज्य का कर्तव्य है कि वह:
आर्थिक असमानता कम करे
आजीविका के साधनों का समान वितरण सुनिश्चित करे
किसानों को सस्ती व ब्याजमुक्त कृषि सामग्री उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
3. अनुच्छेद 43 – आजीविका की सुरक्षा
राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसान को ऐसा वातावरण मिले जिससे वह सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सके।
4. कृषि (Development & Regulation) से जुड़े कानून
भारत सरकार का दायित्व है कि वह:
कृषि उत्पादन की लागत नियंत्रित करे
किसानों को शोषण से बचाए
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराए
कानूनी मांग (LEGAL DEMANDS)
अतः, उपर्युक्त तथ्यों एवं विधिक प्रावधानों के आलोक में, हम भारत सरकार से निम्नलिखित कानूनी मांगें करते हैं:
1 प्रत्येक ज़िले एवं ब्लॉक स्तर पर सरकारी खाद, बीज एवं कृषि दवाइयों की दुकानें स्थापित की जाएँ।
2 इन दुकानों के माध्यम से 100% प्रमाणित, गुणवत्तापूर्ण एवं नकली-मुक्त सामग्री उपलब्ध कराई जाए।
3 किसानों को खाद, बीज एवं दवाइयों की ब्याजमुक्त आपूर्ति (Interest-Free Supply) सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें साहूकारों पर निर्भर न रहना पड़े।
4 इन दुकानों को निजी मुनाफ़ाखोरी से पूर्णतः मुक्त रखा जाए तथा पारदर्शी मूल्य प्रणाली लागू हो।
5 यदि उपरोक्त मांगों की अनदेखी होती है, तो यह किसानों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
कानूनी चेतावनी (LEGAL NOTICE CLAUSE)
यदि भारत सरकार द्वारा इस कानूनी मांग पर ठोस कार्यवाही नहीं की जाती है, तो Kishan Majdur Ekta निम्नलिखित कदम उठाने के लिए बाध्य होगी:
माननीय न्यायालय की शरण
जनहित याचिका (PIL)
संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक आंदोलन
जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों की होगी।
अतः, हम आशा करते हैं कि भारत सरकार किसानों की दुर्दशा को समझते हुए इस कानूनी एवं न्यायोचित मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।