60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों के लिए "वनप्रस्थ कार्ड" की शुरुआत किए जाने के संबंध में विधिक मांग-पत्र
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह बार-बार प्रतिपादित किया गया है कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन, सामाजिक सुरक्षा, यात्रा, स्वास्थ्य एवं आर्थिक गरिमा भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं।
राज्य का यह दायित्व है कि वह अपनी आर्थिक क्षमता के भीतर नागरिकों को वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता उपलब्ध कराए। 60 वर्ष से अधिक आयु के किसानों के लिए विशेष पहचान योजना इसी दायित्व का प्रत्यक्ष अनुपालन होगी।
किसान सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग में आते हैं। अतः राज्य पर यह संवैधानिक दायित्व है कि वह उनके हितों की रक्षा हेतु विशेष योजनाएं लागू करे।
जब वरिष्ठ नागरिकों, असंगठित श्रमिकों एवं अन्य वर्गों के लिए विशेष कार्ड/योजनाएं लागू की जा सकती हैं, तो वरिष्ठ किसानों के लिए पृथक "वनप्रस्थ कार्ड" न होना समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का भी उल्लंघन प्रतीत होता है।
अतः, उपरोक्त तथ्यों एवं संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर, हम विधिक रूप से यह मांग करते हैं:
60 वर्ष से अधिक आयु के सभी किसानों के लिए यह योजना शुरू की जाए।
निःशुल्क या रियायती रेल/बस यात्रा, सरकारी अस्पतालों में प्राथमिकता, सरकारी योजनाओं में विशेष वरीयता, वृद्ध किसानों की अलग पहचान और सम्मानजनक सामाजिक दर्जा।
Centrally Sponsored Scheme के रूप में लागू किया जाए, जिससे सभी राज्यों में समान रूप से इसका लाभ मिल सके।
योजना के लिए Notification एवं समय-सीमा तय की जाए।
हम आशा करते हैं कि भारत सरकार इस विषय की गंभीरता को समझते हुए उचित समयावधि में आवश्यक विधायी/कार्यकारी कदम उठाएगी।
हालांकि, यदि इस विधिक मांग पर यथोचित समय में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो Kishan Majdur Ekta संविधान के अनुच्छेद 226/32 के अंतर्गत उचित न्यायिक मंच का सहारा लेने का अधिकार सुरक्षित रखती है, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों की होगी।
पैन इंडिया रेल/बस यात्रा निःशुल्क या रियायती दरों पर
सरकारी अस्पतालों में प्राथमिकता
सरकारी योजनाओं में Priority Access
वृद्ध किसानों की अलग पहचान और सामाजिक सम्मान
वृद्ध किसानों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए हमसे जुड़ें
यदि आप किसानों की मांगों को पूरा करना चाहते हैं तो फ़ॉर्म भरकर सबमिट करें।